हम अपने त्वचा और बालों की तो खूब देखभाल करते हैं, पर क्या कभी आँखों की सेहत का ध्यान रखते हैं? आँखें हमारे शरीर का सबसे कीमती अंग हैं, इसलिए इनकी सही देखभाल जरूरी है। आइए जानते हैं कुछ आयुर्वेदिक उपाय, जो आँखों की लालिमा, दर्द, सूजन और अन्य समस्याओं में लाभकारी हैं ?
आज के समय में हर व्यक्ति चाहता है कि उसका चेहरा दमकता और आकर्षक दिखे। लेकिन भागदौड़ भरी ज़िंदगी, तनाव, प्रदूषण और अनियमित दिनचर्या ने हमारी त्वचा की प्राकृतिक चमक को छीन लिया है। बाज़ार में मिलने वाले महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स अक्सर अस्थायी परिणाम देते हैं और उनमें मौजूद केमिकल्स लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। आयुर्वेद, जो हजारों साल पुरानी भारतीय चिकित्सा पद्धति है, में ऐसे अनगिनत उपाय हैं जो त्वचा को अंदर से पोषण देकर स्थायी निखार प्रदान करते हैं। इनमें से सबसे असरदार उपायों में से एक हैं — आयुर्वेदिक फेस पैक, जो पूरी तरह प्राकृतिक जड़ी-बूटियों, फूलों, और घरेलू सामग्रियों से बनाए जाते हैं।
बाल झड़ना (Hair Fall) आज के समय में एक आम समस्या बन गई है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों को प्रभावित करती है। तनाव, प्रदूषण, अनुचित आहार, हार्मोनल असंतुलन, और रासायनिक उत्पादों का अत्यधिक उपयोग इसके प्रमुख कारण हैं। आयुर्वेद, भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति, बालों के झड़ने को रोकने और बालों को स्वस्थ बनाने के लिए प्राकृतिक और समग्र उपाय प्रदान करती है। यह ब्लॉग बाल झड़ने की समस्या के आयुर्वेदिक उपचार, जड़ी-बूटियों, आहार, और जीवनशैली पर केंद्रित है, जो लगभग 4000 शब्दों में इस समस्या के समाधान के लिए एक विस्तृत मार्गदर्शिका प्रदान करता है।
हर सुबह जब आप अपने तकिए पर बाल देखते हैं, क्या दिल घबरा जाता है? नहाते वक्त, कंघी करते समय, यहां तक कि ज़रा सा हाथ फेरने पर भी अगर आपके बाल टूट रहे हैं, तो ये लेख सिर्फ आपके लिए है। क्योंकि इसका समाधान आपको किसी केमिकल वाले तेल, शैम्पू या दवाइयों में नहीं… बल्कि भारत की हज़ारों साल पुरानी चिकित्सा प्रणाली – आयुर्वेद में मिलेगा।
अनुभूत चिकित्सीय प्रयोग 1 - गठिया रोग की सफल चिकित्सा यह एक विशेष प्रकार की चाय है इसको तैयार करने के लिये 2.5 लीटर शुद्ध जल में 350 ग्राम चीनीके साथ 1-2 चम्मच चायकी पत्ती को उबालकर साफ कपड़ेसे छानकर चौड़े मुंहके काँचकी बोतलमें गुनगुना होनेतक ठंडा करके, इसमें कल्चर की 20 ग्राम मात्रा मिला देते हैं। गर्मियों में 7 दिनों में और जाड़ों में 15 दिनोंमें कल्चर का किण्वीरण हो जाता है और वह जम जाता है जिसे अलग करके साफ काँच के बरतन में पानी में डुबोकर रख देते हैं।
जुकाम से बार-बार आक्रांत होने की व्याधि असंख्यॊ॑ नर नारियों में पाई जाती है इसका कारण है आहार बिहार का प्रदूषण, भोजन में अम्ल और मधुर रसों का अति सेवन, खट्टे, नमकीन, चटपटे, मिठाइयां एवं फास्ट फुड्स के अति सेवन से रस धातु दूषित हो जाती है अथवा इसकी अतिशय वृद्धि हो जाती है उपद्रव स्वरूप इस्नोफीलिया रेस्पिरेटरी एलर्जी ,एवं ब्राऺकियल अस्थमा, यक्ष्मा
रक्तचाप में वृद्धि यदि आप उच्च रक्तचाप के जीर्ण रोगी हैं एवं नियमित रूप से एलोपैथी दवाएं लेनी पड़ती है तो साथ में निम्न प्रयोग भी करें स्थाई रूप में उच्च रक्तचाप से मुक्ति पा लेंगे जटामांसी 300 ग्राम लेकर उसमें 30 हिस्से करें रात को 10 ग्राम जटामांसी 100 ग्राम पानी में भिगो दें प्रात मसलकर छान लें और दो चम्मच मधु मिलाकर पीवे' पथ्यापथ्य का ध्यान रखते हुए 60 दिन के सेवन द्वारा रोग से पूर्ण छुटकारा मिल जाएगा
ग्रीष्म ऋतू में जो भीषण गर्म हवाओं के झोंके चलते हैं उन्हें हम बोलचाल की भाषा में “लू “ कहते हैं | ग्रीष्म ऋतू के प्रारम्भ में दिनभर धूल भारिटेज़ हवाएं चलने लगती हैं ये गर्म हवाएं अधिक तीव्र होने के कारण धरती की स्निग्धता का शोषण कर लेती हैं जिसके कारन मानव, जीव-जंतु तथा पेड़ पौधों में जलीयांश मैं कमी आ जाती है जिसके फलस्वरुप समस्त दुनिया को परेशानी का सामना करना पडता है |
सौंफ घर -घर में मुखशुद्धि के रूप में प्रचलित सौंफ का उपयोग प्राचीनकाल से ही औषधि के रूप में भी होता रहा है | इसके अलावा सौंफ का उपयोग मसालों और पान में डाले जाने वाले मसाले के रूप में भी होता है | गांव में आज भी लोग ठंडाई शरबत बनाकर इसका सेवन करते हैं| पेट के रोगों के लिए तो ये रामबाण औषधि है | सूखी सौंफ श्लेष्मिक कला और पाचन तंत्र पर प्रभावकारी असर करता है |
मानव आदिकाल से ही सुंदरता का पुजारी रहा है | उसे अपनी सुंदरता को बनाये रहने से ही मानसिक सुंदरता अर्थात उच्च कोटि के भाव उत्कृष्टता के साथ बने रहते हैं | अतः अपने शरीर के मुखकमल की सुंदरता निमित्य प्रत्येक व्यक्ति को सदाचार पूर्वक अपनी सुंदरता को बरकरार रखना चाहिए , क्योकि मुखकमल द्वारा ही व्यक्ति की मानसिक अवस्था एवं चरित्र का ज्ञान किया जा सकता है| 14-15 वर्ष की आयु के बाद मुख पर सेमल के कांटे के समान कफ,वायु एवं रक्त से युवाओ में होने वाली छोटी-छोटी फुंसियां निकलने लगती हैं जिसे मुंहासे कहते हैं |
सरलतापूर्वक प्रसव के लिए - हींग भूनकर चूर्ण बना लें,चार माशा शुद्ध गो - घृत में मिलाकर खिलाने से सरलतापूर्वक प्रसव होने में सहायता मिलती है | इसके अतिरिक्त एक तोला राई के चूर्ण में भुनी हुई हींग का चूर्ण मिलाकर गरम जल के साथ सेवन करने से मूढगर्भ आसानी से बाहर आ जाता है |
(१) कान दर्द - प्याज पीसकर उसका रस कपडे से छान लें| फिर उसे गर्म कर के चार बूँद कान में डालने से कान का दर्द समाप्त हो जाता है | (२) दांत दर्द - हल्दी एवं सेंधा नमक महीन पीसकर,उसे शुद्ध सरसों के तेल में मिलाकर सुबह-शाम मंजन करने से दातों का दर्द ठीक होता है | (३) दातों के सुराख़ - कपूर को महीन पीसकर दातों पर ऊँगली से लगावें और उसे मलें | सुराखों को भली प्रकार से साफ़ कर लें| फिर सुराखों के नीचे कपूर को कुछ समय तक दबाकर रखने से दातों का दर्द निश्चित रूप से समाप्त हो जाता है |
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