भारत के मध्य भाग—विशेषकर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़—में निवास करने वाली बैगा जनजाति अपनी अनोखी जीवनशैली, परंपराओं और खासतौर पर प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के लिए प्रसिद्ध है। ये लोग सदियों से जंगलों में उपलब्ध जड़ी-बूटियों के माध्यम से न केवल सामान्य बल्कि कई असाध्य रोगों का भी उपचार करते आ रहे हैं।
प्रस्तावना आज के समय में कब्ज (Constipation) एक बहुत ही सामान्य लेकिन खतरनाक समस्या बन चुकी है। अधिकतर लोग इसे हल्के में लेते हैं, लेकिन यही छोटी समस्या आगे चलकर कई बड़े रोगों का कारण बन सकती है। जब आंतों में मल सूखकर रुक जाता है और आसानी से बाहर नहीं निकलता, तो उसे कब्ज कहते हैं। इस स्थिति में मल या तो बहुत कठिनाई से निकलता है, या बहुत कम मात्रा में और अधूरा निकलता है। ? यही कारण है कि कहा जाता है: “कब्ज सभी रोगों की जड़ है”
आज के समय में गर्दन दर्द (Neck Pain) एक आम समस्या बन चुकी है। पहले यह समस्या केवल उम्रदराज लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या गलत मुद्रा में बैठने से यह समस्या और बढ़ रही है।
आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति वही है जिसमें सभी धातु (रस, रक्त, मांस आदि) संतुलित हों, इंद्रियां मजबूत हों और जठराग्नि (पाचन शक्ति) सही हो। इसका अर्थ है— न शरीर बहुत दुबला हो न शरीर बहुत मोटा हो लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अधिकतर लोग या तो मोटापे से परेशान हैं या दुबलापन से।
आज के समय में अम्लपित्त (Acidity) एक अत्यंत सामान्य लेकिन परेशान करने वाला रोग बन चुका है। शायद ही कोई ऐसा परिवार हो जिसमें कोई सदस्य इस समस्या से ग्रसित न हो। आधुनिक जीवनशैली, अनियमित खान-पान, तनाव और गलत आदतों के कारण यह रोग तेजी से बढ़ रहा है। आयुर्वेद में इसे “अम्लपित्त” कहा गया है, जबकि एलोपैथी में इसे Hyperacidity या Acid Reflux के नाम से जाना जाता है। सामान्य भाषा में इसे खट्टी डकारें, सीने में जलन या पेट में एसिडिटी कहा जाता है।
✍️ Author: Dr. Pushpendra Sen आज के समय में Chronic Pain (दीर्घकालिक दर्द) केवल एक साधारण समस्या नहीं बल्कि एक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर बन चुका है। यह दर्द धीरे-धीरे शुरू होता है और लंबे समय तक शरीर में बना रहता है, जिससे व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित होती है। भारत में लाखों लोग कमर दर्द, घुटनों के दर्द, गर्दन के दर्द और माइग्रेन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। खास बात यह है कि कई लोग इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समस्या और गंभीर हो जाती है।
गठिया (Arthritis) एक ऐसी समस्या है जो जोड़ों में दर्द, सूजन और जकड़न पैदा करती है। समय रहते सही एक्सरसाइज, डाइट और लाइफस्टाइल अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। इस लेख में गठिया के कारण, लक्षण और बिना सर्जरी राहत पाने के प्रभावी उपाय विस्तार से बताए गए हैं।
आज के समय में हार्ट अटैक दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारियों में से एक बन चुका है। पहले यह समस्या 50+ उम्र के लोगों में देखी जाती थी, लेकिन अब 25–40 साल के युवा भी तेजी से इसका शिकार हो रहे हैं। अधिकतर लोग मानते हैं कि: “हार्ट अटैक का मुख्य कारण कोलेस्ट्रॉल है” लेकिन हाल ही में वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया गया कि: “हार्ट अटैक का असली कारण Homocysteine और Magnesium की कमी है”
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आजकल गलत खान-पान, ज्यादा प्रोटीन वाला भोजन, फास्ट फूड और कम पानी पीने की वजह से यूरिक एसिड बढ़ना एक आम समस्या बन गई है। जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा हो जाता है, तो यह जोड़ों में जमा होकर दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी पैदा कर सकता है। आयुर्वेद में कई ऐसे घरेलू उपाय बताए गए हैं, जो शरीर को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने में मदद करते हैं। उन्हीं में से एक है कुल्थी दाल (Horse Gram) का उपयोग।
गुर्दे (किडनी) हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं, जो बिना रुके 24 घंटे काम करते हैं। यह छोटे-से सेम के आकार के अंग होते हैं, लेकिन इनका काम बेहद बड़ा होता है। शरीर के अंदर मौजूद रक्त को साफ करना, विषैले पदार्थों को बाहर निकालना, और शरीर के तरल संतुलन को बनाए रखना—ये सब कार्य किडनी ही संभालती है।
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